Yaksha Gandharva Kinnara: यक्ष, गंधर्व, किन्नर… देवता नहीं, इंसान भी नहीं; तो कौन थीं ये रहस्यमयी दिव्य जातियां?
Yaksha Gandharva Kinnara: वेदों, पुराणों, बौद्ध और जैन ग्रंथों में यक्ष, गंधर्व और किन्नर जैसी रहस्यमयी दिव्य जातियों का उल्लेख मिलता है. इन्हें न पूरी तरह देवता माना गया, न साधारण मनुष्य. आइए जानते हैं, आखिर ये कौन थे, यक्ष, गंधर्व और किन्नर?
Yaksha Gandharva Kinnara: अगर आप सोचते हैं कि वेदों और पुराणों की गाथाओं और कहानियों में सिर्फ देवता, राक्षस और इंसान ही थे, तो यह कहानी इससे कहीं ज्यादा दिलचस्प और रोचक है. क्योंकि, इन ग्रंथों में 3 ऐसी रहस्यमयी दिव्य जातियों का भी जिक्र मिलता है, जिन्हें न पूरी तरह देवता माना गया और न ही साधारण मनुष्य. ये थीं यक्ष, गंधर्व और किन्नर. इन्हें दिव्य और अर्द्ध-दिव्य योनि की जातियां भी कहा गया है. इनकी अपनी अलग पहचान, शक्तियां और जिम्मेदारियां थीं, जो ग्रंथों में वर्णित कथाओं से प्राप्त होती है. आपको बता दें कि इनकी चर्चा केवल हिन्दू ग्रंथों में नहीं बल्कि बौद्ध कथाओं और जैन श्रुतियों में भी प्राप्त होता है. आइए जानते हैं, आखिर ये कौन थे, यक्ष, गंधर्व और किन्नर?
यक्ष – धन और रहस्य के संरक्षक
पुराणों में यक्षों को धन, प्रकृति और धरती के छिपे खजानों का रक्षक माना गया है. इनके राजा कुबेर हैं, जो देवताओं के कोषाध्यक्ष भी हैं. कहते हैं, शुरुआत में जो शक्तियां रक्षा का काम करती थीं, वे यक्ष कहलाईं, जबकि विनाश करने वाली शक्तियां ‘रक्ष’ यानी राक्षस मानी गईं. ‘यक्ष’ शब्द का संबंध रहस्यमयी या जादुई शक्ति से भी जोड़ा जाता है. युधिष्ठिर के साथ महाभारत का प्रसिद्ध यक्ष-प्रश्न प्रसंग इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जहां यक्ष ने युधिष्ठिर की बुद्धिमत्ता की परीक्षा ली थी. यक्षों की स्त्रियों को यक्षिणी कहा गया है. अनेक कथाएं ऐसी हैं, जिसमें यक्षिणी मनुष्यों के साथ संभोग कर लेती हैं.
ग्रंथों में गंधर्वों की पहचान देवलोक के बेहतरीन गायक, संगीतकार और कलाकार के रूप में होती है. इंद्र की सभा में संगीत और नृत्य से देवताओं का मनोरंजन करना इनका प्रमुख कार्य माना गया है. इन्हें प्रेम, कला और सौंदर्य का प्रतीक भी माना जाता है. गंधर्वों के राजा चित्ररथ बताए गए हैं. संगीत की परंपरा से इनका रिश्ता इतना गहरा है कि गंधर्ववेद नाम का एक उपवेद भी मिलता है, जिसमें संगीत और वाद्य कला का वर्णन है. कई पौराणिक कथाओं में गंधर्वों का संबंध अप्सराओं से भी बताया गया है. ये संभोग के लिए अनेक विवाह कर लेते है, वो भी आनन-फानन में. इसलिए ऐसे विवाह को ‘गंधर्व विवाह’ भी कहा गया है.
‘किन्नर’ शब्द का अर्थ है, ‘क्या यह ‘नर’ (मनुष्य) है?’ पुराणों में इनका रूप आधा मनुष्य और आधा घोड़ा या पक्षी जैसा बताया गया है. इन्हें भी संगीत, नृत्य और भक्ति में निपुण माना गया है. इनका निवास हिमालय, कैलाश और हेमकूट जैसे दिव्य क्षेत्रों में बताया गया है. कई ग्रंथों में इन्हें कुबेर के सेवक और देवताओं के भक्त के रूप में भी वर्णित किया गया है.
यक्ष, गंधर्व और किन्नर सिर्फ पौराणिक पात्र नहीं, बल्कि भारतीय परंपरा में अलग-अलग शक्तियों और गुणों के प्रतीक भी माने गए हैं. यक्ष धन और संरक्षण का संदेश देते हैं, तो गंधर्व कला और संगीत का, जबकि किन्नर भक्ति और अलौकिक सौंदर्य का प्रतीक माने जाते हैं. यही वजह है कि वेद-पुराणों की इन रहस्यमयी जातियों की चर्चा आज भी लोगों की जिज्ञासा का विषय बनी रहती है.