---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

Sankashti Chaturthi 2024: рдЖрдЬ рд╕рдВрдХрд╖реНрдЯреА рдЪрддреБрд░реНрдереА рдкрд░ рдкрдврд╝реЗрдВ рдпреЗ рдХрдерд╛, рджреВрд░ рд╣реЛрдВрдЧреА рд╕рднреА рдкрд░реЗрд╢рд╛рдирд┐рдпрд╛рдВ!

Sankashti Chaturthi 2024: рднрдЧрд╡рд╛рди рдЧрдгреЗрд╢ рдХреЛ рд╕рдорд░реНрдкрд┐рдд рдЖрд╢реНрд╡рд┐рди рдорд╛рд╣ рдХреЗ рдХреГрд╖реНрдг рдкрдХреНрд╖ рдХреА рдЪрддреБрд░реНрдереА рддрд┐рдерд┐ рдХрд╛ рд╕рдирд╛рддрди рдзрд░реНрдо рдХреЗ рд▓реЛрдЧреЛрдВ рдХреЗ рд▓рд┐рдП рдЦрд╛рд╕ рдорд╣рддреНрд╡ рд╣реИ, рдЬрд┐рд╕реЗ рджреЗрд╢ рдХреЗ рдХрдИ рд░рд╛рдЬреНрдпреЛрдВ рдореЗрдВ рд╡рд┐рдШреНрдирд░рд╛рдЬ рд╕рдВрдХрд╖реНрдЯреА рдЪрддреБрд░реНрдереА рдХреЗ рдирд╛рдо рд╕реЗ рднреА рдЬрд╛рдирд╛ рдЬрд╛рддрд╛ рд╣реИред рдЗрд╕ рджрд┐рди рд╡реНрд░рдд рдФрд░ рдкреВрдЬрд╛ рдХреЗ рд╕рд╛рде-рд╕рд╛рде рдХрдерд╛ рд╕реБрдирдирд╛ рд╡ рдкрдврд╝рдирд╛ рднреА рдЬрд░реВрд░реА рд╣реЛрддрд╛ рд╣реИред рдЪрд▓рд┐рдП рдЬрд╛рдирддреЗ рд╣реИрдВ рд╡рд┐рдШреНрдирд░рд╛рдЬ рд╕рдВрдХрд╖реНрдЯреА рдЪрддреБрд░реНрдереА рд╡реНрд░рдд рдХреА рд╕рд╣реА рдХрдерд╛ рдХреЗ рдмрд╛рд░реЗ рдореЗрдВред

---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

Sankashti Chaturthi 2024: सनातन धर्म के लोगों के लिए विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत का विशेष महत्व है। जो आश्विन मास की चतुर्थी तिथि के दिन रखा जाता है। ये दिन भगवान गणेश को समर्पित है। इस दिन व्रत रखने के साथ-साथ गणपति बप्पा की पूजा की जाती है। इससे घर-परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। साथ ही बप्पा के आशीर्वाद से सभी दुख-दर्द का अंत होता है। वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल आश्विन मास की चतुर्थी तिथि यानी विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत 21 सितंबर को रखा जाएगा।

चतुर्थी तिथि पर गणपति जी की पूजा का शुभ मुहूर्त प्रात: काल 07 बजकर 40 मिनट से लेकर सुबह 09 बजकर 11 मिनट पर है। वहीं शाम में 06 बजकर 19 मिनट से लेकर रात 07 बजकर 47 मिनट तक भी पूजा का मुहूर्त है। हालांकि विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी की पूजा कथा के बिना अधूरी मानी जाती है। व्रत के साथ-साथ कथा सुनने व पढ़ने से ही पूजा का पूर्ण फल मिलता है। चलिए जानते हैं विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी की असली व्रत कथा के बारे में।

---विज्ञापन---

विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी व्रत की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, दानवीर दैत्यराज बलि के सौ प्रतापी पुत्र में से बाणासुर भी एक था, जिसने भगवान शिव की कठिन तपस्या की थी। बाणासुर की एक बेटी भी थी, जिसका नाम उषा था। एक दिन उषा को सपना आया कि वो अपने होने वाले पति अनिरुद्ध से दूर जा रही हैं। इस सपने के बाद से ही वो विचलित हो गई। उन्होंने अपनी सहेली चित्रलेखा से कहा कि, ‘त्रिभुवन में रहने वाले सभी लोगों के चित्र बनवाए, जिसमें से वो अनिरुद्ध को पहचान पाए।’

ये भी पढ़ें- सालों बाद अब चंद्र ग्रहण पर 3 राशियों पर होगी पैसों की बारिश! 21 अद्भुत योग का बना महासंयोग

---विज्ञापन---

अनिरुद्ध कहां पर मिला?

चित्रलेखा ने चित्र को बनवाकर उषा को दे दिया। उषा ने एक चित्र को देखते हुए कहा, ‘ये वो ही है, जिसके साथ सपने में मेरा पाणिग्रहण हुआ था।’ इसके बाद उषा ने अपनी सहेली को उसे ढूंढने का आदेश दिया। अपनी सखी के कहने पर चित्रलेखा ने कई स्थानों पर अनिरुद्ध को ढूंढा। कई दिनों बाद द्वारकापुरी में अनिरुद्ध मिला, जिसके बाद उसे बाणासुर नगरी लाया गया।

श्रीकृष्ण ने लोमश मुनि की ली मदद

अनिरुद्ध के गुम होते ही राजा प्रद्युमन अपने पुत्र के शोक में चले गए। तब दुखी रुक्मिणी ने भगवान कृष्ण से कहा, ‘हमारे पौत्र का किसी ने हरण किया है या वो अपनी इच्छा से गया है? कृपया बताइए। नहीं तो, मैं अपने प्राण त्याग दूंगी।’ रुक्मिणी की बातें सुनकर श्रीकृष्ण जी ने यादवों की सभा बुलाई। जहां पर उन्होंने लोमश ऋषि के दर्शन करके उन्हें सारी घटना के बारे में बताया। तब लोमश मुनि ने कृष्ण जी को बताया कि, ‘बाणासुर नगरी की उषा नामक एक कन्या की सहेली चित्रलेखा ने आपके पौत्र का अपहरण किया है, जो बाणासुर के महल में ही है।’

---विज्ञापन---

संकष्टी चतुर्थी व्रत का महत्व

इसी के आगे उन्होंने कहा, ‘आप आश्विन मास में आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि का अनुष्ठान कीजिए। इस व्रत को करने से आपका पौत्र वापस आ जाएगा।’ श्रीकृष्ण ने विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत रखा और विधिपूर्वक पूजा भी की। माना जाता है कि इस व्रत के शुभ प्रभाव से ही कृष्ण जी को उनका पौत्र वापस मिला था। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विघ्नराज संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से संपूर्ण विपत्तियों का नाश होता है। साथ ही जीवन में शांति और धन-धान्य का वास होता है। हालांकि बाद में कृष्ण जी ने बाणासुर की सहस्त्र भुजाओं को काटकर उसे युद्ध में पराजित कर दिया था।

ये भी पढ़ें- Pitru Paksha 2024: श्राद्ध का खाना घर पर नहीं बना पा रहे हैं तो क्या करें? जानें खाने से जुड़े जरूरी नियम

---विज्ञापन---

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Sep 18, 2024 06:00 AM

End of Article

About the Author

Nidhi Jain

рдирд┐рдзрд┐ рдХреА рдкрдврд╝рдиреЗ рдФрд░ рд▓рд┐рдЦрдиреЗ рдореЗрдВ рд╣рдореЗрд╢рд╛ рд╕реЗ рд░реБрдЪрд┐ рд░рд╣реА рд╣реИ. рдЗрдиреНрд╣реЛрдВрдиреЗ рдЕрдкрдиреЗ рдХрд░рд┐рдпрд░ рдХреА рд╢реБрд░реБрдЖрдд рдкреНрд░рддрд┐рд╖реНрдард┐рдд рдиреНрдпреВрдЬрдкреЗрдкрд░ рдореЗрдВ рдиреНрдпреВрдЬ рд░рд╛рдЗрдЯрд┐рдВрдЧ рд╕реЗ рдХреА рдереА, рдЬрд┐рд╕рдХреЗ рдмрд╛рдж рджреЗрд╢-рд╡рд┐рджреЗрд╢, рд▓рд╛рдЗрдлрд╕реНрдЯрд╛рдЗрд▓, рдзрд░реНрдо рдФрд░ рдЖрдзреНрдпрд╛рддреНрдорд┐рдХ рд╡рд┐рд╖рдпреЛрдВ рдкрд░ рд╡реНрдпрд╛рдкрдХ рдЕрдзреНрдпрдпрди рдХрд┐рдпрд╛. рдЕрдм рдкрд┐рдЫрд▓реЗ 4 рд╕рд╛рд▓ рд╕реЗ рд╡рд╣ рдбрд┐рдЬрд┐рдЯрд▓ рдореАрдбрд┐рдпрд╛ рд╕реЗ рдЬреБрдбрд╝реА рд╣реБрдИ рд╣реИрдВ. рд╡рд░реНрддрдорд╛рди рдореЗрдВ News24┬ардореЗрдВ┬ардзрд░реНрдо┬ардФрд░┬ардЬреНрдпреЛрддрд┐рд╖┬ард╕реЗрдХреНрд╢рди рдореЗрдВ рдХрд╛рдо рдХрд░ рд░рд╣реА рд╣реИрдВ.

ЁЯУз Email: nidhi.jain@bagconvergence.in

ЁЯРж Twitter/X: https://x.com/jainidhi125?

Read More
---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---
рд╕рдВрдмрдВрдзрд┐рдд рдЦрдмрд░реЗрдВ
Sponsored Links by Taboola