‘मौके की तलाश में है दिमागी नक्सल’, PM मोदी ने लाल किले से किसे दी चेतावनी; युवाओं के लिए जताई चिंता
PM Narendra Modi On Naxal Mentality: स्वतंत्रता दिवस के भाषण में पीएम नरेंद्र मोदी ने न सिर्फ नक्सलवाद और माओवाद को देश से पूरी तरह खत्म करने की बात कही, साथ ही उन्होंने इशारों-इशारों में ऐसे लोगों पर भी निशाना साधा जो हिंसा तो नहीं करते, लेकिन दिमागी तौर पर नक्सलवादी सोच रखते हैं, और ऐसी विचारधारा को बढ़ावा देते हैं.
Who Is Dimagi Naxals: पीएम नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2026 को लाल किले से अपने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में ‘नक्सली सोच’ की कड़ी आलोचना की. उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, ‘हमारे जंगलों में हम हथियारों के दम पर नक्सलियों को खत्म करने में कामयाब रहे हैं. लेकिन नक्सली मानसिकता वाले लोग अभी भी मौजूद हैं. वो हमारे समाज के लिए खतरा बने हुए हैं. हमें इन ‘दिमागी नक्सलियों’ को ढूंढकर अलग-थलग करना होगा.’
‘नक्सलवाद को खत्म करना जरूरी’
पीएम मोदी ने कहा कि देश को पीछे रखने वाली दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना बहुत जरूरी है. ‘नक्सलवाद और माओवाद ने लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर दिया है. इन्होंने अनगिनत माताओं के जवान बेटों को छीन लिया और देश भर के परिवारों के सपने तोड़ दिए. तकरीबन 4 दशकों तक, नक्सलवाद ने भारत के बड़े हिस्सों और वहां की आबादी के एक बड़े हिस्से को अपनी गिरफ्त में रखा; बंदूक के दम पर राज किया और संविधान की धज्जियां उड़ाईं. आम नागरिकों की रक्षा करते हुए हमारे 3,500 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षाकर्मी शहीद हुए. नक्सलवाद ने धरती को खून से लाल कर दिया था.’
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#WATCH | दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए कहा, "21वीं सदी में दशकों पुरानी चुनौतियों को खत्म करना बहुत अनिवार्य है। नक्सलवाद, माओवाद लाखों युवाओं के भविष्य को तबाह कर दिया, अनेक माताओं के दुधमल… pic.twitter.com/iDcvcJ5YtN
पीएम मोदी ने आगे कहा, ‘जब आपने हमें 2014 में सेवा करने का मौका दिया, तो हमने उसी दिन देश को नक्सलवाद से मुक्त करने का संकल्प लिया. आज मुझे ये कहते हुए खुशी हो रही है कि नक्सली और माओवादी हिंसा में अब टिके रहने की ताकत नहीं बची है और ये अपने आखिरी दौर में है. हम इसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. जिन इलाकों में कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं, जहां की मिट्टी कभी खून से सनी होती थी, आज उन्हीं नक्सल-प्रभावित क्षेत्रों में विकास, विश्वास और प्रयास का तिरंगा शान से लहरा रहा है और वो नक्सलवाद-मुक्त होने की तरफ बढ़ रहे हैं.’
पीएम मोदी ने किस तरफ इशारा किया?
पीएम नरेंद्र मोदी इशारों-इशारों में उन लोगों को चेतावनी दी है, जो भले ही बंदूक या किसी तरह के हथियार के दम पर नक्सलवाद से सीधे तोर पर न जुड़े हों, लेकिन अपने मन में नक्सलवादी और माओवादी सोच रखते हैं, जो देश के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं. ऐसा माना जा रहा है कि उन्होंने ‘अर्बन नक्सल’ निशाना साधा है.
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‘अर्बन नक्सल’ किसे कहते हैं?
‘अर्बन नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल आमतौर पर उन शहरी बुद्धिजीवियों, एक्टिविस्ट्स, लेखकों और ऑर्गेनाइजेशंस पर कटाक्ष के तौर पर किया जाता है. जिन पर आरोप लगाया जाता है कि वो सीधे तौर से हथियार उठाए बिना नक्सली या माओवादी विचारधारा या उनके मकसद को सपोर्ट करते हैं, उनके लिए प्रचार करते हैं या उन्हें किसी तरह मदद पहुंचाते हैं. कई बार किताबों या पब्लिक मीटिंग के जरिए इस विचारधारा का समर्थन किया जाता है.