---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

G-7 Summit 2026: рдХреНрдпрд╛ рд╣реИ G-7 рд╕рдорд┐рдЯ? рдЬрд┐рд╕рдореЗрдВ рдЖрдЬ PM рдореЛрджреА рд▓реЗрдВрдЧреЗ рд╣рд┐рд╕реНрд╕рд╛, рдХреНрдпрд╛ рднреВрдорд┐рдХрд╛ рдирд┐рднрд╛рддрд╛ рд╣реИ рднрд╛рд░рдд рдФрд░ рд░реВрд╕-рдЪреАрди рдЗрд╕рд╕реЗ рдмрд╛рд╣рд░ рдХреНрдпреЛрдВ

рдкреНрд░рдзрд╛рдирдордВрддреНрд░реА рдирд░реЗрдВрджреНрд░ рдореЛрджреА рдЗрд╕ рд╕рдордп рдЕрдкрдиреЗ рд╡рд┐рджреЗрд╢ рджреМрд░реЗ рдкрд░ рд╣реИрдВ. рдкреАрдПрдо рдореЛрджреА рдЕрдкрдиреА рджреЛ рджреЗрд╢реЛрдВ рдХреА рдпрд╛рддреНрд░рд╛ рдХреЗ рддреАрд╕рд░реЗ рдЪрд░рдг рдореЗрдВ рдЖрдЬ рдлреНрд░рд╛рдВрд╕ рдХреЗ рдПрд╡рд┐рдпрд╛рдВ рдкрд╣реБрдВрдЪреЗрдВрдЧреЗ. рдмрддрд╛ рджреЗрдВ рдХрд┐ рдпрд╣рд╛рдВ рдкреАрдПрдо рдореЛрджреА G7 рд╢рд┐рдЦрд░ рд╕рдореНрдореЗрд▓рди рдореЗрдВ рд╢рд╛рдорд┐рд▓ рд╣реЛрдВрдЧреЗ. рд╕рдореНрдореЗрд▓рди рдХреЗ рджреМрд░рд╛рди рд╡рд╣ G7 рджреЗрд╢реЛрдВ рдХреЗ рдиреЗрддрд╛рдУрдВ, рдЖрдордВрддреНрд░рд┐рдд рд╕рд╛рдЭреЗрджрд╛рд░ рджреЗрд╢реЛрдВ рдХреЗ рдкреНрд░рддрд┐рдирд┐рдзрд┐рдпреЛрдВ рдФрд░ рдЕрдВрддрд░рд░рд╛рд╖реНрдЯреНрд░реАрдп рд╕рдВрдЧрдардиреЛрдВ рдХреЗ рдкреНрд░рдореБрдЦреЛрдВ рдХреЗ рд╕рд╛рде рд╡рд┐рдЪрд╛рд░-рд╡рд┐рдорд░реНрд╢ рдХрд░реЗрдВрдЧреЗ.

---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस समय अपने विदेश दौरे पर हैं. पीएम मोदी अपनी दो देशों की यात्रा के तीसरे चरण में आज फ्रांस के एवियां पहुंचेंगे. बता दें कि यहां पीएम मोदी G7 शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे. सम्मेलन के दौरान वह G7 देशों के नेताओं, आमंत्रित साझेदार देशों के प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के साथ विचार-विमर्श करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी की इस जी-7 सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप के साथ भी मुलाकात संभव है. इस दौरान पीएम मोदी जी7 शिखर सम्मेलन के अलग-अलग सत्रों में हिस्सा लेंगे, जिसमें एआई पर भी चर्चा शामिल है. सम्मेलन के इतर प्रधानमंत्री मोदी कई विश्व नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें भी करेंगे. आज यानी मंगलवार को पीएम मोदी कनाडा, यूके और यूएई के नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी करेंगे. पीएम मोदी की कल यानी 17 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाकात है. हालांकि अब लोगों के मन में सवाल ये है कि दुनिया की दो बड़ी ताकतें चीन और रूस इस समूह का हिस्सा क्यों नहीं हैं? तो चलिए जानते हैं G7 के बारे में सब कुछ…

---विज्ञापन---

क्या है G7 और कैसे हुई शुरुआत?

जी7 यानी ‘ग्रुप ऑफ सेवन’ दुनिया की सात सबसे विकसित और औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं का समूह है. इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा शामिल हैं. इस समूह की शुरुआत 1975 में हुई थी. उस समय दुनिया तेल संकट, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता से जूझ रही थी. तब इन संकटों से निपटने के लिए फ्रांस की पहल पर अमेरिका, ब्रिटेन, पश्चिम जर्मनी, इटली और जापान के नेताओं की बैठक हुई.

फिर अगले साल यानी 1976 में कनाडा भी इस ग्रुप में शामिल हो गया और इस तरह जी7 की नींव पड़ी. इसका मकसद दुनियाभर में उभरती आर्थिक चुनौतियों पर मंथन करने इससे निपटने के लिए साझा प्लान तैयार करना था. बाद में इसके एजेंडे में जलवायु परिवर्तन, सुरक्षा, ऊर्जा, आतंकवाद, तकनीक और भू-राजनीतिक मुद्दे भी शामिल हो गए.

---विज्ञापन---

कहां हो रहा G7 सम्मेलन?

दरअसल, फ्रांस की अध्यक्षता में G7 शिखर सम्मेलन हो रहा है. इसमें दुनिया की प्रमुख औद्योगिक अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं के साथ कई महत्वपूर्ण साझेदार देशों के राष्ट्राध्यक्ष और सरकार प्रमुख भी भाग ले रहे हैं. सम्मेलन में वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया की स्थिति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है.

कितना ताकतवर है G7?

जी7 में वैसे तो दुनिया के केवल सात देश ही शामिल हैं, लेकिन दुनिया की कुल अर्थव्यवस्था में इन देशों की बेहद बड़ी हिस्सेदारी है. दुनिया की बड़ी वित्तीय संस्थाओं, निवेश, तकनीकी नवाचार और सैन्य शक्ति पर इन देशों का महत्वपूर्ण प्रभाव है.

---विज्ञापन---

अमेरिका, जापान और यूरोप की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इसमें शामिल हैं. इसलिए जी7 की बैठकों में लिए गए फैसले अक्सर वैश्विक बाजारों, व्यापार नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर बड़ा असर डालते हैं. हालांकि पिछले दो दशकों में चीन, भारत और दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के तेजी से बढ़ने के कारण जी7 की वैश्विक आर्थिक हिस्सेदारी पहले के मुकाबले कम हुई है, लेकिन राजनीतिक और रणनीतिक प्रभाव आज भी काफी मजबूत है.

यह भी पढ़ें- अमेरिका-ईरान की डील से क्यों भड़का इजरायल? नेतन्याहू कैबिनेट ने समझौता मानने से किया इनकार

---विज्ञापन---

चीन क्यों नहीं है G7 का सदस्य?

जी7 के सदस्य देशों का दावा है कि उनका संगठन ऐसी नहीं कि इसमें आर्थिक आकार के आधार पर सदस्यता दी जाती हो. यह मूल रूप से लोकतांत्रिक और विकसित देशों का समूह है, जिसकी स्थापना 1970 के दशक में हुई थी. उस समय चीन की अर्थव्यवस्था आज जैसी मजबूत नहीं थी. बाद में चीन आर्थिक महाशक्ति जरूर बना, लेकिन लोकतंत्र की राह से कोसों दूर है. इसके अलावा चीन और G7 देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद हैं. मानवाधिकार, दक्षिण चीन सागर, ताइवान, व्यापार नियम और वैश्विक व्यवस्था जैसे विषयों पर पश्चिमी देशों और चीन के विचार अलग-अलग हैं. यही वजह है कि चीन G7 का सदस्य नहीं है, हालांकि G7 की बैठकों में चीन से जुड़े मुद्दों अक्सर ही चर्चा होती रहती है.

भारत क्यों नहीं है G7 का सदस्य?

भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है और जल्द ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताई जा रही है. इसके बावजूद भारत G7 का सदस्य नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि जी7 का गठन उस समय हुआ था जब भारत की अर्थव्यवस्था काफी छोटी थी. समूह की सदस्यता बाद में नहीं बढ़ाई गई.

---विज्ञापन---

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में भारत की भूमिका तेजी से बढ़ी है. दुनिया की सबसे बड़ी आबादी, तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, मजबूत लोकतांत्रिक ढांचा और रणनीतिक महत्व के कारण भारत को लगातार G7 सम्मेलनों में विशेष अतिथि के रूप में बुलाया जाता रहा है.

बता दें कि साल 2021 से लेकर अब तक लगभग हर G7 समिट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है. यह इस बात का संकेत माना जाता है कि वैश्विक मंच पर भारत की अहमियत लगातार बढ़ रही है.

---विज्ञापन---

G7 में भारत की भूमिका?

इस साल भी फ्रांस में हो रहे G7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हिस्सा लेंगे. इस दौरान पीएम मोदी की के नेताओं के साथ बातचीत शामिल है. इसके अलावा भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित उपयोग, सतत आर्थिक विकास, जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल साउथ की चिंताओं को भी प्रमुखता से उठा सकता है.

क्या भविष्य में भारत G7 का सदस्य बन सकता है?

कई विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक परिस्थितियों में G7 का विस्तार होना चाहिए. भारत, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण कोरिया और ब्राजील जैसे देशों को शामिल करने की मांग भी समय-समय पर उठती रही है. हालांकि सदस्यता विस्तार पर अभी कोई सहमति नहीं बनी है. लेकिन यह तय है कि भारत के बिना अब G7 की कोई भी बड़ी चर्चा पूरी नहीं मानी जाती.

---विज्ञापन---

17 जून पीएम मोदी-डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात

जी-7 शिखर सम्मेलन के बाद पीएम मोदी 17 जून को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी मुलाकात करेंगे. व्हाइट हाउस की तरफ से दोनों नेताओं के बीच होने वाली मुलाकात पर मुहर गलग चुकी है. यह एक बाइलेटरल मीटिंग होगी. US एडमिनिस्ट्रेशन के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक दोनों नेताओं से एक प्रस्तावित इंडिया-US ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत में हो रही प्रोग्रेस का रिव्यू करने की उम्मीद है. जो भारत और अमेरिका के लिए अहम है. दोनों नेताओं के बीच लंबे समय बाद मुलाकात होने वाली है. जिस पर सभी की नजरें होगी.

First published on: Jun 16, 2026 09:41 AM

End of Article

About the Author

Versha Singh

рд╡рд░реНрд╖рд╛ рд╕тАНрд┐рдВрд╣ News 24 рдбтАНрд┐рдЬрд┐рдЯрд▓ рдореЗрдВ рдмрддреМрд░ рд╕реАрдитАНрд┐рдпрд░ рд╕рдм рдПрдбтАНрд┐рдЯрд░ рдХреЗ рдкрдж рдкрд░ рдХрд╛рд░реНрдпрд░рдд рд╣реИрдВ. рд╡рд░реНрд╖рд╛ рдХреЛ рдбтАНрд┐рдЬрд┐рдЯрд▓ рдореАрдбтАНрд┐рдпрд╛ рдореЗрдВ 6 рд╕рд╛рд▓ рд╕реЗ рдЕрдзрд┐тАНрдХ рдХрд╛ рдЕрдиреБрднрд╡ рд╣реИ. рд░рд╛рд╖реНтАНрдЯреНрд░реАрдп, рдЕрдВрддрд░рд░рд╛рд╖реНрдЯреНрд░реАрдп рдФрд░ рд╕рдорд╕рдорд╛рдптАНрд┐рдХ рд╡тАНрд┐рд╖рдпреЛрдВ рдкрд░ рд╡рд░реНрд╖рд╛ рдХреА рдЕрдЪреНтАНрдЫреА рдкрдХрдбрд╝ рд╣реИ. рдЗрд╕рдХреЗ рдЕрд▓рд╛рд╡рд╛ рд░рд╛рдЬрдиреАрддтАНрд┐рдХ, рдХреНрд░рд╛рдЗрдо рдФрд░ рдЯреНрд░реЗрдВрдбрд┐рдВрдЧ рдЦрдмрд░реЗрдВ рднреА рд▓тАНрд┐рдЦрддреА рд╣реИрдВ. рдЖрдк рд╡рд░реНрд╖рд╛ рд╕рд┐рдВрд╣ рд╕реЗ рд╕реЛрд╢рд▓ рдореАрдбрд┐рдпрд╛ рдкреНрд▓реЗрдЯрдлреЙрд░реНрдо X (Twitter), Facebook рдФрд░ LinkedIn рдкрд░ рднреА рдЬреБрдбрд╝ рд╕рдХрддреЗ рд╣реИрдВ. рд╢рд┐рдХрд╛рдпрдд рдФрд░ рд╕реБрдЭрд╛рд╡ рдХреЗ рд▓рд┐рдП рд╡рд░реНрд╖рд╛ рд╕тАНрд┐рдВрд╣ рд╕реЗ Versha.Singh@bagconvergence.in рдкрд░ рд╕рдВрдкрд░реНрдХ рдХтАНрд┐рдпрд╛ рдЬрд╛ рд╕рдХрддрд╛ рд╣реИ.

Read More
---рд╡рд┐рдЬреНрдЮрд╛рдкрди---
рд╕рдВрдмрдВрдзрд┐рдд рдЦрдмрд░реЗрдВ
Sponsored Links by Taboola