---विज्ञापन---

रुपये की जोरदार वापसी, 12 साल में पहली बार दिखाई ऐसी छलांग; RBI के एक दांव से चित हुआ डॉलर

RBI के कड़े एक्शन के बाद रुपये ने 12 साल की सबसे लंबी छलांग भरी है। $106 के कच्चे तेल और ट्रंप की धमकियों के बीच भारतीय करेंसी ने अपना दम दिखाया है। सट्टेबाजों पर नकेल कसने का असर अब दिखने लगा है। क्या रुपया फिर से 90 के नीचे आएगा? पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें

---विज्ञापन---

Rupee Vs Dollar: जहां एक तरफ पूरी दुनिया युद्ध और महंगाई के डर से कांप रही है, वहीं भारतीय रुपया आज एक अलग ही तेवर में नजर आया। 2 अप्रैल 2026 का दिन भारतीय करेंसी के इतिहास में दर्ज हो गया है। डॉलर के मुकाबले रुपया आज 1.8% मजबूत हुआ है, जो कि सितंबर 2013 के बाद की सबसे बड़ी बढ़त है।

आखिर ऐसा क्या हुआ कि कल तक 95 के स्तर को छूने वाला रुपया आज अचानक रॉकेट बन गया? आइए इस दिलचस्प कहानी को समझते हैं:

---विज्ञापन---

RBI का वो मास्टरस्ट्रोक जिसने खेल पलट दिया

शेयर बाजार भले ही गिर रहा हो, लेकिन RBI ने रुपये को बचाने के लिए कड़े कदम उठाए हैं। 1 अप्रैल को रिजर्व बैंक ने बैंकों के लिए नो-डिलीवरेबल फॉरवर्ड्स (NDF) के दरवाजे बंद कर दिए।

आसान भाषा में इसे समझें तो लोग भविष्य में डॉलर महंगा होने की उम्मीद में सट्टेबाजी कर रहे थे, जिससे डॉलर की आर्टिफिशियल डिमांड (बनावटी मांग) बढ़ रही थी। RBI ने इस सट्टेबाजी पर लगाम लगा दी। अब कंपनियां कैंसिल किए गए विदेशी मुद्रा कॉन्ट्रैक्ट्स को दोबारा बुक भी नहीं कर पाएंगी।

---विज्ञापन---

डॉलर की जमाखोरी पर लगाम
जैसे ही RBI ने नियम सख्त किए, बैंकों और कंपनियों के बीच डॉलर बेचने की होड़ लग गई। जिन लोगों ने डॉलर दबा कर रखे थे, उन्हें अब अपनी पोजीशन खाली करनी पड़ी। इससे बाजार में डॉलर की सप्लाई बढ़ी और रुपया 93.17 के स्तर तक मजबूत हो गया।

ट्रंप की धमकी और कच्चे तेल का खौफ
रुपये की यह मजबूती इसलिए भी खास है क्योंकि बाहरी हालात बेहद खराब हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को पाषाण युग (Stone Age) में भेजने की धमकी दी है। इस बयान के बाद कच्चा तेल (Brent Crude) $106 प्रति बैरल के पार निकल गया। युद्ध के दूसरे महीने में प्रवेश करने के साथ ही तेल और ऊर्जा ठिकानों पर हमलों का खतरा बढ़ गया है। आमतौर पर जब तेल महंगा होता है, तो रुपया गिरता है। लेकिन आज RBI के घरेलू सुधारों ने वैश्विक दबाव को मात दे दी।

---विज्ञापन---

आम आदमी के लिए इसका क्या मतलब है?
अगर रुपया मजबूत रहता है, तो विदेशों से सामान मंगाना (Import) थोड़ा सस्ता होगा। इससे ईंधन और इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों में होने वाली बेतहाशा बढ़ोतरी पर लगाम लग सकती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि जब तक तेल की कीमतें $100 के नीचे नहीं आतीं, रुपये पर दबाव बना रहेगा।

First published on: Apr 02, 2026 11:51 AM

End of Article
---विज्ञापन---
संबंधित खबरें
Sponsored Links by Taboola